मध्य रेल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में ₹323.50 करोड़ की स्क्रैप बिक्री दर्ज की – सभी क्षेत्रीय रेलों में सर्वाधिक

‘ स्वच्छता ही सेवा 2026’ के तहत ‘जीरो स्क्रैप मिशन’ ने कचरे को संपदा में बदला

मध्य रेल ने अपने ‘जीरो स्क्रैप मिशन’ के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल से सितंबर 2026 तक ₹323.50 करोड़ की स्क्रैप बिक्री दर्ज की है, जो सभी क्षेत्रीय रेलों में सर्वाधिक है।

सितंबर 2026 में ₹70.42 करोड़ की स्क्रैप बिक्री भी मध्य रेल द्वारा एक माह में की गई अब तक की सर्वाधिक स्क्रैप बिक्री है।

‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के दौरान ₹44.24 करोड़ का स्क्रैप निस्तारित

रेल मंत्रालय द्वारा ‘स्वच्छता में सहभागिता; स्वच्छ भारत, विकसित भारत’ थीम के तहत 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान के अनुरूप मध्य रेल के सामग्री प्रबंधन (स्टोर्स) विभाग ने रेलवे परिसरों में जमा स्क्रैप एवं अनुपयोगी परिसंपत्तियों की पहचान, पृथक्करण और व्यवस्थित निस्तारण के लिए निरंतर अभियान चलाया।

17 सितंबर 2026 से शुरू हुए इस अभियान के दौरान मध्य रेल ने 4,884 मीट्रिक टन स्क्रैप का निस्तारण किया, जिसका मूल्य ₹44.24 करोड़ है। इससे ‘जीरो स्क्रैप मिशन’ को और मजबूती मिली तथा ‘स्वच्छता से समृद्धि’ के उद्देश्यों में योगदान हुआ।

‘जीरो स्क्रैप मिशन’ के तहत मध्य रेल ने अनुपयोगी ई-कचरे (ई-वेस्ट) का भी निस्तारण किया है। चालू वित्तीय वर्ष में सितंबर 2026 तक ₹1.11 करोड़ मूल्य के ई-कचरे की बिक्री की जा चुकी है।

प्रमुख स्क्रैप एवं अनुपयोगी परिसंपत्तियों का निस्तारण

वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान विभिन्न प्रकार के स्क्रैप एवं अनुपयोगी रेलवे परिसंपत्तियों के निस्तारण के लिए अभियान चलाए गए, जिनमें शामिल हैं:

  • रेल पी-वे स्क्रैप: 29,993 मीट्रिक टन
  • स्लीपर: 1,72,195 नग
  • लौह स्क्रैप: 15,547 मीट्रिक टन
  • अलौह स्क्रैप: 1,999 मीट्रिक टन
  • रोलिंग स्टॉक: 23 लोकोमोटिव, 62 कोच एवं 70 वैगन
  • ई-कचरा: 46.85 मीट्रिक टन

निस्तारण अभियानों के अंतर्गत आईसीएफ कोच, रेल पी-वे सामग्री, स्लीपर, लौह एवं अलौह स्क्रैप, अनुपयोगी घोषित लोकोमोटिव, कोच, वैगन तथा अन्य अनुपयोगी रेलवे परिसंपत्तियों को भी शामिल किया गया।

इन पहलों से रेलवे यार्डों, कार्यशालाओं, डिपो तथा ट्रैक किनारे के क्षेत्रों में स्वच्छता सुधारने में मदद मिली है। साथ ही, स्क्रैप के कारण घिरी मूल्यवान रेलवे भूमि एवं स्थान को भी उपयोग में लाने के लिए उपलब्ध कराया गया है।

मंडल/डिपो-वार स्क्रैप बिक्री

वित्तीय वर्ष 2026-27 में दर्ज ₹323.50 करोड़ की संचयी स्क्रैप बिक्री में विभिन्न मंडलों का योगदान इस प्रकार है:

  • भुसावल मंडल: ₹57.27 करोड़
  • मुंबई मंडल: ₹52.08 करोड़
  • पुणे मंडल: ₹47.55 करोड़
  • नागपुर मंडल: ₹46.08 करोड़
  • सोलापुर मंडल: ₹14.69 करोड़

शेष राशि मध्य रेल के अन्य डिपो से प्राप्त हुई है।

‘कचरे से संपदा’ की ओर

‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ के पांच प्रमुख स्तंभों में से एक ‘स्वच्छता से समृद्धि’ के संदर्भ में यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। ‘जीरो स्क्रैप मिशन’ के माध्यम से मध्य रेल जमा स्क्रैप को राजस्व अर्जित करने वाले संसाधनों में परिवर्तित कर रही है।

अनुपयोगी सामग्रियों का व्यवस्थित निस्तारण न केवल भारतीय रेल के लिए राजस्व अर्जित करता है, बल्कि कार्यस्थलों को स्वच्छ बनाने, सुरक्षा में सुधार, स्थान के बेहतर उपयोग, संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण के अनुकूल स्क्रैप प्रबंधन में भी योगदान देता है। यह पहल पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों को दोबारा उपयोग में लाकर चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को भी बढ़ावा देती है।

‘जीरो स्क्रैप स्थिति’ की दिशा में प्रतिबद्धता

सभी मंडलों एवं डिपो में जमा स्क्रैप की पहचान, पृथक्करण और निस्तारण के लिए चलाए गए गहन एवं निरंतर अभियानों के परिणामस्वरूप वित्तीय वर्ष 2026-27 की इसी अवधि के लिए अब तक की सर्वाधिक स्क्रैप बिक्री दर्ज की गई है। यह उपलब्धि स्वच्छ भारत के निर्माण में मध्य रेल के योगदान को और मजबूत करती है।

इन पहलों का उद्देश्य वैज्ञानिक इन्वेंटरी प्रबंधन एवं व्यवस्थित निस्तारण के माध्यम से स्क्रैप को मूल्यवान, राजस्व अर्जित करने वाली परिसंपत्तियों में परिवर्तित करना है। इससे ‘जीरो स्क्रैप स्थिति’ प्राप्त करने की दिशा में मध्य रेल की प्रतिबद्धता और मजबूत हुई है।

Source – CR & RSB

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