लंबी दूरी की ट्रेनों में गंदगी और खराब टॉयलेट्स की शिकायतों पर अब रेलवे बोर्ड बेहद सख्त नजर आ रहा है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक हालिया रिपोर्ट में ट्रेनों की स्वच्छता को लेकर उठाए गए गंभीर सवालों के बाद, रेलवे बोर्ड ने देश के सभी जोनल रेलवे से इस पर विस्तृत और स्पष्ट जवाब तलब किया है। रेलवे बोर्ड ने सभी जोन के महाप्रबंधकों (General Managers) को एक आधिकारिक पत्र भेजकर ऑडिट में सामने आई कमियों पर जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
संसद में पिछले साल 20 अगस्त को "भारतीय रेलवे में लंबी दूरी की ट्रेनों में स्वच्छता" शीर्षक के साथ पेश की गई यह ऑडिट रिपोर्ट मुख्य रूप से साल 2018-19 से लेकर 2022-23 तक की अवधि के कामकाज पर केंद्रित है। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर उजागर किया गया है कि लंबी दूरी के सफर में यात्रियों को मिलने वाली सफाई व्यवस्था उम्मीद के मुताबिक नहीं है। इसके साथ ही, यात्रियों से मिलने वाले फीडबैक और धरातल की असली हकीकत में काफी बड़ा अंतर देखने को मिला है। रिपोर्ट में स्वच्छता से जुड़े बजट और रेलवे के वित्तीय प्रबंधन में भी गंभीर कमियों की बात कही गई है।
कैग (CAG) ने इस मामले में रेलवे बोर्ड से केवल स्पष्टीकरण ही नहीं मांगा, बल्कि पुख्ता आंकड़ों की भी मांग की है। विभिन्न जोनल रेलवे द्वारा चलाए जा रहे 'क्लीन ट्रेन स्टेशन' (CTS) और 'ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस' (OBHS) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के प्रभावी रूप से लागू होने के दावों को जांचने के लिए बोर्ड से ठोस प्रमाण पेश करने को कहा गया है। रेलवे बोर्ड ने अब साफ कर दिया है कि इस ऑडिट में सामने आई सभी आपत्तियों पर रेल मंत्रालय के "कार्रवाई नोट" के साथ जोनल रेलवे को जल्द से जल्द अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
Source - RSB

