जयपुर मंडल के दौसा-गंगापुर सिटी रेलखंड के लालसोट रेलवे स्टेशन पर मॉक ड्रिल आयोजित

रेलवे,NDRF, SDRF,Civil Defence,Home Guards, Fire department and District Administration ने संयुक्त रूप से परखी दुर्घटना राहत एवं बचाव तैयारियां

उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल द्वारा दुर्घटना राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं तथा आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखने के उद्देश्य से शनिवार,12 सितम्बर 2026 को दौसा-गंगापुर सिटी रेलखंड के लालसोट रेलवे स्टेशन पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। मॉक ड्रिल में रेलवे के विभिन्न विभागों के साथ नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF),स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF),Civil Defence, Fire Department,Home Guards के सहयोग एवं समन्वय से राहत एवं बचाव कार्यों का व्यावहारिक अभ्यास किया गया।

मॉक ड्रिल के तहत लालसोट रेलवे स्टेशन यार्ड में किलोमीटर संख्या 44/3-4 पर गाड़ी संख्या 09725 के पटरी से उतरने तथा लगभग 15-20 यात्रियों के घायल होने जैसी काल्पनिक दुर्घटना की स्थिति दर्शाई गई। दुर्घटना की सूचना मिलते ही रेलवे की निर्धारित दुर्घटना राहत एवं आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सक्रिय किया गया तथा राहत एवं बचाव संसाधनों को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

घटना की सूचना के पश्चात जयपुर से स्वचालित दुर्घटना राहत एवं बचाव ट्रेन को तत्काल रवाना किया गया। साथ ही वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी एवं उनकी टीम घटनास्थल पर पहुंची। इसके साथ ही वाणिज्य,परिचालन, इंजीनियरिंग,सिग्नल एवं दूरसंचार,विद्युत,चिकित्सा, आरपीएफ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर पहुंचे। NDRF,SDRF, सिविल डिफेंस,होम गार्ड एवं फायर विभाग की टीमों ने भी राहत एवं बचाव कार्यों में भाग लेते हुए आपदा की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं का अभ्यास किया।

मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित रेल दुर्घटना की स्थिति में रेलवे की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता,राहत एवं बचाव संसाधनों की उपलब्धता तथा रेलवे एवं NDRF,SDRF,सिविल डिफेंस, होम गार्ड एवं फायर विभाग सहित संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय को परखना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल से वास्तविक आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी, तेज और व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में सहायता मिलती है। साथ ही मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तत्परता,राहत एवं बचाव संसाधनों की उपलब्धता, घटनास्थल तक पहुंचने में लगने वाले समय तथा विभिन्न विभागों एवं आपदा राहत एजेंसियों के बीच समन्वय का व्यावहारिक आकलन भी किया गया। आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई,घायलों को सुरक्षित निकालने,चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने तथा राहत-बचाव कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए आवश्यक बिंदुओं की समीक्षा की गई।

मॉक ड्रिल की घोषणा 11:44 बजे की गई। इसके पश्चात रेलवे,NDRF एवं SDRF द्वारा उपलब्ध संसाधनों एवं निर्धारित कार्यप्रणाली का व्यावहारिक परीक्षण किया गया। इस संयुक्त मॉक ड्रिल के माध्यम से रेलवे की आपदा प्रबंधन एवं दुर्घटना राहत व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा आपात परिस्थितियों में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने का अभ्यास किया गया।

Source - NWR & RSB

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