पूर्वोत्तर रेलवे पर ‘‘विश्व पर्यावरण दिवस‘‘ के उपलक्ष्य में 15 मई से 05 जून, 2026 तक चलाये जा रहे ‘विश्व पर्यावरण दिवस अभियान‘ के पाँचवें दिन 19 मई, 2026 को मुख्यालय तथा मंडलों के प्रमुख स्टेशनों, कार्यालयों, रेलवे कॉलोनियों एवं चिकित्सालयों में पर्यावरण संरक्षण से सम्बन्धित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये।
इसी क्रम में, लखनऊ मंडल पर अभियान के पाँचवें दिन विभिन्न पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये गये, जिसमें गोरखपुर, खलीलाबाद, बस्ती, मनकापुर, गोंडा, लखनऊ जं., बादशाहनगर एवं ऐशबाग स्टेशनों तथा रेलवे कालोनियांे में स्वच्छता से सम्बन्धित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सभी को स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाते हुये प्लेटफॉर्म पर कूड़े-कचरे के पृथक्करण के बारे में जानकारी दी गई तथा हरे, नीले एवं पीले डस्टबिन के उपयोग के बारे में बताया गया। साथ ही वेंडरों एवं संविदा सफाई मित्रों ने श्रमदान कर खान-पान स्टॉल के आसपास की साफ-सफाई की, जिसमें लगभग 900 लोगों ने भाग लिया।
वाराणसी मंडल के बनारस, वाराणसी सिटी, आजमगढ़, बलिया, भटनी, सीवान, छपरा, गाजीपुर सिटी, मऊ, प्रयागराज रामबाग, देवरिया सदर एवं सलेमपुर स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर कचरा अलग-अलग करने के लिये विशेष अभियान चलाया गया। साथ ही यात्रियों को हरे, नीले एवं पीले डस्टबिन तथा उनके उपयोग के बारे में जागरूक करने के लिये स्टेशनों पर जागरूकता अभियान चलाया गया। स्टेशनों एवं आस-पास के क्षेत्र में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसमें रेल कर्मचारियों तथा यात्रियों ने प्लास्टिक कचरे को कम करने और उसे सही स्थान पर निस्तारित करने के लिये बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यात्रियों को सिंगल यूज प्लास्टिक के नुकसान, सफाई के महत्व, पानी एवं ऊर्जा की बचत तथा सतत जीवनशैली अपनाने के बारे में जागरूक करने के लिये विभिन्न स्टेशनों पर जन सम्बोधन प्रणाली के माध्यम से पर्यावरण के बारे में जागरूकता के संदेश निरन्तर प्रसारित किये गये। रेल कर्मचारियों, यात्रियों एवं हाउसकीपिंग कर्मचारियों ने सफाई, पानी एवं ऊर्जा की बचत तथा पर्यावरण के लिये सही तरीकों का समर्थन करने के लिये अभियान में सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया।
इज्जतनगर मंडल पर अभियान के अंतर्गत लालकुआँ, काठगोदाम, रुद्रपुर सिटी, बरेली सिटी, कासगंज, काशीपुर, हल्द्वानी, फर्रुखाबाद, फतेहगढ़, कन्नौज, इज्जतनगर एवं पीलीभीत स्टेशनों पर यात्रियों एवं रेल कर्मचारियों को अपशिष्ट पृथक्करण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। स्टेशनों पर स्थापित रंग-कोडित डस्टबिनों के सही उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई ताकि कचरे का वैज्ञानिक एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके, जिसमें हरे रंग के डस्टबिन जैविक एवं गीले कचरे; जैसे- खाद्य अवशेष एवं अन्य जैविक पदार्थों के लिये उपयोग किये जाते हैं। नीले रंग के डस्टबिन सूखे एवं पुनर्चक्रण योग्य कचरे जैसे प्लास्टिक बोतलें, कागज एवं धातु सामग्री हेतु निर्धारित हैं तथा पीले रंग के डस्टबिन घरेलू खतरनाक एवं स्वच्छता सम्बन्धी अपशिष्टों; जैसे- मास्क एवं संक्रमित सामग्री के निस्तारण हेतु उपयोग किये जाते हैं। स्टेशनों पर उद्घोषणाओं, पोस्टरों, बैनरों एवं डिजिटल संदेशों के माध्यम से यात्रियों को ‘‘कचरे को स्रोत पर अलग करने‘‘ तथा रेल परिसरों को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त बनाये रखने के लिये प्रेरित किया गया। रेल एवं हाउसकीपिंग कर्मचारियों तथा यात्रियों ने अभियान में सक्रिय सहभागिता करते हुये स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
यह अभियान पूर्वोत्तर रेलवे की स्वच्छ, हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल रेल परिसर विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
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