पूर्वोत्तर रेलवे में ‘क्विक कोच वाटरिंग सिस्टम’ की स्थापना से यात्रियों को मिल रही बेहतर सुविधा

यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में  रेलवे लगातार नवाचार कर रहा है। इसी क्रम में, ट्रेनों के कोचों में पानी की उपलब्धता को बनाए रखने के लिए ‘क्विक कोच वाटरिंग सिस्टम’ की स्थापना की जा रही है। यह प्रणाली गाड़ियों में कम समय में पानी भरने की सुविधा प्रदान करती है, जिससे संचालन में दक्षता और यात्रियों की संतुष्टि दोनों में वृद्धि होती है। पूर्वोत्तर रेलवे के ऐशबाग, गोरखपुर जंक्शन, बनारस, छपरा, मऊ जंक्शन, फर्रूखाबाद, कासगंज और लालकुआँ स्टेशनों पर यह सिस्टम पहले ही स्थापित किया जा चुका है। सीतापुर और बलिया में कार्य प्रगति पर है।

यह तकनीक 55 लीटर प्रति सेकेंड की गति से पानी भरने की क्षमता रखती है, जिससे पूरे रेक को बेहद कम समय में भरना संभव हो जाता है। इसके माध्यम से रीयल टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा उपलब्ध है, जिससे पानी की उपलब्धता, दबाव, प्रवाह और खपत की जानकारी स्क्रीन पर तुरंत देखी जा सकती है। यह प्रणाली मोबाइल एसएमएस के ज़रिए भी संचालित की जा सकती है और मैनुअल मोड में भी कार्य कर सकती है।

प्रमुख लाभ:

  • तेजी से जल भराव: 55 लीटर/सेकेंड की गति से कम समय में कोचों में पानी भरना संभव।

  • समय की बचत: ट्रेनों के ठहराव की अवधि नहीं बढ़ती, समयबद्ध संचालन में मदद।

  • पानी की बर्बादी में कमी: निर्धारित प्रवाह व नियंत्रण प्रणाली के कारण जल संरक्षण।

  • रियल टाइम मॉनिटरिंग: एक स्क्रीन पर प्रेशर, फ्लो, खपत आदि का लाइव डाटा उपलब्ध।

  • मोबाइल से नियंत्रण: एसएमएस के ज़रिए भी सिस्टम को किया जा सकता है संचालित।

  • कम रखरखाव: मैनुअल व ऑटोमैटिक दोनों विकल्पों के साथ, पर्यावरण अनुकूल तकनीक।

  • मानव श्रम की बचत: श्रमिकों पर भार कम, संचालन अधिक कुशल।

रेलवे की यह पहल यात्रियों के लिए जल सुविधा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी प्रगति है, जो समय, संसाधन और पर्यावरण—तीनों के संरक्षण की दिशा में भी सहायक है।

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