आरेडिका की उपलब्धियों पर उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री से आरेडिका के महाप्रबंधक पी. के. मिश्रा की हुई सार्थक चर्चा।

आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना, रायबरेली (उत्तर प्रदेश) एवं रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला (पंजाब) के महाप्रबंधक प्रशांत कुमार मिश्रा ने दिनांक 10 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश की माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से लखनऊ में शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात अत्यंत सौहार्दपूर्ण, प्रेरणादायी एवं सार्थक रही।

इस अवसर पर महाप्रबंधक श्री मिश्रा ने आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना (आरेडिका) द्वारा अब तक निर्मित 15,000 से अधिक अत्याधुनिक रेल कोचों, आरेडिका में  निर्मित फोर्ज्ड व्हीलों, तथा आरेडिका में निर्मित पहली वंदे भारत ट्रेन के निर्माण, उसकी तकनीकी विशेषताओं एवं उत्कृष्ट गुणवत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आरेडिका द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयासों-जैसे जल संरक्षण, हरित ऊर्जा पहल, रेल कौशल विकास योजना तथा व्यापक वृक्षारोपण अभियान पर भी प्रकाश डाला।

महाप्रबंधक श्री मिश्रा ने बताया कि आरेडिका में भू-जल संरक्षण क्षमता बढ़कर 730 मिलियन लीटर हो चुकी है। इन प्रयासों से भारतीय रेलवे की निर्माण क्षमता, तकनीकी दक्षता एवं आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हो रही उल्लेखनीय प्रगति परिलक्षित होती है। इस दौरान श्री मिश्रा ने भारतीय रेलवे के इतिहास पर आधारित अपनी चर्चित पुस्तक ‘रेल्स थ्रू राज’ एवं ‘टेल्स फ्रॉम रेल्स”  की एक-एक प्रति माननीय मुख्यमंत्री को भेंट की। उन्होंने पुस्तक के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि ‘रेल्स थ्रू राज’  पुस्तक प्राथमिक ऐतिहासिक स्रोतों पर आधारित है तथा ब्रिटिश काल में भारतीय रेलवे के विकास को वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक सामान्य पाठकों के साथ-साथ इतिहास एवं रेलवे विषय शोधकर्ताओं के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।

अपनी दूसरी पुस्तक “टेल्स फ्रॉम रेल्स”  के बारे में बताया कि भारतीय रेल की आत्मा में उतरने वाली एक अद्वितीय साहित्यिक यात्रा है, जहाँ इस्पात पटरियाँ और भाप के इंजन केवल भौगोलिक दूरियाँ ही नहीं पार करते, बल्कि समय, समाज और साम्राज्य के नियमों को भी पुनर्लेखित किया। मात्र तकनीकी विकास से आगे बढ़ते हुए, बत्तीस कहानियों और निबंधों का यह संग्रह “भूतिया श्रमिकों”, आधी रात की डाक गाड़ियों और पटरियों के नीचे दबे बुद्ध की रहस्यमय खोज जैसे विलुप्त संसार को पुनर्जीवित करता है। फ्रांसीसी एन्क्लेवों की उच्चस्तरीय कूटनीति से लेकर जमालपुर की घुड़दौड़ की सामाजिक परंपराओं तक, ये कथाएँ गहन अभिलेखीय शोध को काव्यात्मक और भावपूर्ण गद्य के साथ सहज रूप से पिरोती हैं। यह कृति उस मौन क्रांति का अनिवार्य इतिहास है जिसने आधुनिक भारत की आत्मा को गढ़ा। पुस्तक में रेल से संबंधित कुल 32 सत्य घटनाओं पर आधारित कहानियाँ संकलित हैं।

चर्चा के दौरान माननीय मुख्यमंत्री जी ने रेल कौशल विकास योजना, भूमि सुधार हेतु कम्पोस्ट खाद एवं जल संरक्षण के लिए आरेडिका द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना की तथा कोच निर्माण में गुणवत्ता हेतु विश्वस्तरी मानकों को अपनाने की सलाह दी। 

इस अवसर पर पी के मिश्रा के साथ, प्रधान मुख्य इंजीनीयर एस.पी. यादव, सचिव महाप्रबंधक आर एन तिवारी भी मौजूद रहे।

Source/RSB

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