उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) मुख्यालय में महाप्रबंधक श्री नरेश पाल सिंह द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर तथा दीप प्रज्ज्वलित कर राजभाषा पखवाड़ा के मुख्य समारोह एवं पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए श्री नरेश पाल सिंह ने कहा कि हिंदी सिर्फ एक भाषा ही नहीं, बल्कि एक संस्कृति है। हिंदी उन राष्ट्रीय मूल्यों की प्रतीक है, जो हमें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत से प्राप्त हुए हैं। ये हमारे संविधान की मूल भावना को प्रदर्शित करते हैं। इन्हीं कारणों से 14 सितंबर, 1949 को हिंदी को राजभाषा का संवैधानिक दर्जा दिया गया।
श्री सिंह ने कहा कि उत्तर मध्य रेलवे का संपूर्ण कार्यक्षेत्र साहित्य और संस्कृति की समृद्ध विरासत का गढ़ रहा है। यह क्षेत्र सुविख्यात हिंदी साहित्यकारों की जन्मस्थली अथवा कर्मस्थली रही है और इस क्षेत्र में हिंदी समृद्ध और परिष्कृत हुई है। प्रयागराज को तो साहित्य एवं संस्कृति की राजधानी भी कहा जाता है। यह हम सबके लिए गौरव की बात है कि हमें ऐसी महान कर्मभूमि से जुड़ने का सुअवसर प्राप्त हुआ है। सूर, तुलसी, मैथिलीशरण गुप्त, महावीर प्रसाद द्विवेदी, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा और हरिवंश राय बच्चन जैसे कवियों और रचनाकारों के महान योगदान एवं यश के साक्षी इस साहित्यिक अंचल में कार्य करते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का नैतिक दायित्व है कि हम पूरी कर्तव्य भावना के साथ अपने सभी कार्यों में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करें।
महाप्रबंधक श्री नरेश पाल सिंह ने कहा कि ग्राहकों की उत्कृष्ट सेवा की मूल भावना के तहत उन्हें सवारी और मालभाड़ा यातायात सहित रेल परिवहन की नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं की जानकारियाँ हिंदी में उपलब्ध कराना हमारे सर्वोपरि दायित्वों में शामिल है। इससे यात्रियों के प्रति हमारे सामाजिक दायित्व की पूर्ति के साथ ही हमारा व्यावसायिक पक्ष भी मजबूत होता है। हमारी रेलवे के स्टेशन धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं, जहाँ बहुत बड़ी संख्या में देश-विदेश के यात्रियों का आवागमन होता है। वर्तमान में, सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं के साथ हिंदी के अधिकाधिक समन्वय और साहचर्य के द्वारा भाषाई सौहार्द एवं सद्भावना के महत्व को रेखांकित किया जा रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में इस वर्ष महाकुंभ मेला में विभिन्न प्रांतों के हिंदीतर भाषी यात्रियों की सुविधा के लिए प्रयागराज स्थित स्टेशनों पर यात्री सेवा एवं सुविधा से संबंधित आवश्यक सूचनाएं हिंदी और अंग्रेजी के अतिरिक्त अन्य भारतीय भाषाओं में भी प्रसारित की गईं। ऐसे कदमों से विविधता में एकता की भावना मजबूत होती है।
पुरस्कार वितरण एवं अन्य कार्यक्रम
इस अवसर पर मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं प्रधान मुख्य संरक्षा अधिकारी श्री जे. सी. एस. बोरा ने कहा कि हमारा देश विविध भाषाओं एवं बोलियों वाला विशाल देश है। इन सभी भाषाओं में हिंदी का संवैधानिक एवं राष्ट्रीय दृष्टि से विशिष्ट महत्व है। श्री बोरा ने उत्तर मध्य रेलवे में राजभाषा के प्रयोग-प्रसार के लिए किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि कंप्यूटरों पर हिंदी में काम-काज बढ़ाने के लिए निरंतर हिंदी कार्यशालाएं, हिंदी कुंजीयन कार्यशालाएं, हिंदी के प्रख्यात साहित्यकारों की जयंती के अवसर पर संगोष्ठियाँ, साहित्यिक कार्यक्रम, महत्वपूर्ण अवसरों के उपलक्ष्य में मुख्यालय तथा मंडलों और कारखानों में कवि सम्मेलन, काव्यपाठ एवं निबंध लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं तथा राजभाषा के प्रयोग-प्रसार के अवलोकन एवं समीक्षा के लिए राजभाषा प्रदर्शनी लगाई गई। उन्होंने बताया कि हिंदी में उत्कृष्ट कार्य के लिए उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय को नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, प्रयागराज का चल वैजयंती प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में उत्तर मध्य रेलवे की सांस्कृतिक टीम द्वारा महाप्राण 'निराला' की रचना ‘वीणावादिनी वर दे..’ की रागबद्ध सांगीतिक प्रस्तुति की गई और उत्तर मध्य रेलवे भारत स्काउट एवं गाइड संगठन द्वारा लघु नृत्य नाटिका ‘महिषासुरमर्दिनी’ का अत्यंत प्रभावशाली और मंत्रमुग्ध कर देने वाला मंचन किया गया।
राजभाषा प्रदर्शनी में सिगनल एवं दूरसंचार विभाग को सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शनी की शील्ड प्रदान की गई तथा यांत्रिक विभाग को द्वितीय और भंडार को तृतीय पुरस्कार की शील्ड प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त प्रतियोगिताओं के विजेता और हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 91 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी पुरस्कार प्रदान किया गया। इस अवसर पर महाप्रबंधक श्री नरेश पाल सिंह ने मुख्यालय में राजभाषा पखवाड़ा प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों में निर्णायक और समन्वयकर्ता के रूप में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में सभी प्रमुख विभागाध्यक्षों सहित बड़ी संख्या में अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा कर्मचारी उपस्थित थे। उप मुख्य राजभाषा अधिकारी डॉ. स्वामी प्रकाश पाण्डेय द्वारा समारोह के अध्यक्ष महाप्रबंधक श्री नरेश पाल सिंह और सभी आगंतुकों का स्वागत किया गया तथा कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी श्री यथार्थ पाण्डेय ने किया।
Source/RSB

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