रेलवे सुरक्षा बल (RPF) रेल यात्रियों के साथ विश्वास स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से, RPF यात्रियों से बेहतर संवाद स्थापित कर रहा है और उनके सुरक्षा में लगातार प्रयासरत है। सामुदायिक पुलिसिंग का मुख्य उद्देश्य जनता और पुलिस के बीच बेहतर संबंध बनाना है, जिससे न केवल अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सके, बल्कि यात्रियों के साथ विश्वास और सहयोग का मजबूत नेटवर्क भी स्थापित हो सके।
RPF "मुस्कान और खुशियाँ फैलाना" जैसे अभियान चला रहा है, जिसके तहत विशेष अवसरों पर यात्रियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया जाता है और बच्चों को गुब्बारे, मिठाई और टॉफियां दी जाती हैं। इस प्रकार के आयोजनों से यात्रियों को यह विश्वास मिलता है कि RPF उनकी सुरक्षा में एक परिवार की तरह है।
RPF ने विशेष अभियान "मातृशक्ति", "डिग्निटी", और "सेवा" के तहत बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चों और दिव्यांगजनों को सुरक्षा और सहायता प्रदान की है। वर्ष 2024 में, ऑपरेशन डिग्निटी के तहत 4047 व्यक्तियों को मदद मिली, जिसमें 40 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। वहीं ऑपरेशन सेवा के तहत 17119 व्यक्तियों को सहायता प्रदान की गई।
महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए RPF ने "मेरी सहेली" पहल शुरू की है, जिसके अंतर्गत अकेले यात्रा करने वाली महिला यात्रियों को सुरक्षा का विश्वास दिलाया जाता है। 2024 में, 489 सवारी गाड़ियों में औसतन 12,932 महिला यात्रियों को सुरक्षा प्रदान की गई।
इसके अलावा, RPF ऑपरेशन "जीवन रक्षा" और "नन्हे फरिश्ते" जैसे अभियानों के तहत यात्रियों की जान बचाने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम भी कर रहा है। 2024 में, RPF ने 3884 व्यक्तियों की जान बचाई और 14756 बच्चों को सुरक्षित किया।
RPF की सामुदायिक पुलिसिंग रणनीति ने भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है, जिससे यात्रियों का रेलवे के प्रति विश्वास और सुरक्षा बढ़ी है।
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